आखिर आप किसको देंगे अपना वोट

जब आप अतीत को टटोलने की कोशिश कीजिएगा तो आपको नजर ही नहीं आएगा की कोई प्रधानमंत्री न्यूज़ चैनल के उद्घाटन में गए होंगे या मौजूदा वक्त में शामिल हो जाए कई जगह पर कई बातों का जिक्र मिलेगा इंदिरा गांधी बचा करते थे कि कम से कम अखबारों के मंचों पर जाकर भाषण देने की जरूरत इन रूपों में ना पड़े कि सबकी नजर उन्हीं पर आकर टिक जाए। ज्योति बसु बंगाल में भी बचा करते थे कि वह ना जाए। सवाल यह नहीं है कि प्रधानमंत्री को जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिए सवाल यह है कि तब प्रधानमंत्री क्यों नहीं जाते थे और अब प्रधानमंत्री क्यों आ गए दिल्ली में 31 मार्च को प्रधानमंत्री एक न्यूज़ चैनल के समारोह में आए और एक लिहाजा से उद्घाटन उन्हीं के भाषण से हुआ प्रधानमंत्री ने अपना काम किया हमें लगता है अगर न्यूज़ चैनल की टीआरपी बढ़ानी हो तो मोदी ब्रांड से अच्छा कोई ब्रांड नहीं हो सकता शानदार है। वह आए और उन्होंने भाषण दिया और भाषण में बैंकिंग प्रणाली काले धन का जिक्र करके बकायदा उन्होंने कहा 2014 के पहले की बैंकिंग प्रणाली बहुत खराब थी और उन्होंने परीक्षक के साथ जवाब दिया कि मौजूदा वक्त में बहुत अच्छी हुई है हमें लगता है इन आंकड़ों को जानने की कोशिश करनी चाहिए जो आंकड़े आरबीआई ने जारी किए जरा सिलसिलेवार से समझने की कोशिश कीजिए भाषण में पीएम मोदी सबसे ज्यादा बैंकों को लेकर बोले कि कैसे उन्होंने 5 बरस के भीतर डूबी प्रणाली को ठीक कर दिया।

क्योंकि यह पहली बार हुआ की बैंक में जमा जनता की कमाई की रकम लूट को छुपाने के लिए मोदी सत्ता ही सक्रिय हो गई हालात इतने बुरे हो गए कि सत्ता में आने के बाद बरस दर बरस बैंकों का फाइल साफ सुथरी दिखाई दे उसके लिए सिलसिलेवार तरीके से लूट की रकम को रिटर्न ऑफ किया गया जबकि रिकवरी ना के बराबर हुई मसलन 2014-15 में 49 हजार 18 करोड़ रिटर्न ऑफ किया गया और रिकवरी हुई सिर्फ 5461 करोड़ 2015 - 16 में रिटर्न ऑफ किया गया 57585 करोड रिकवरी की गई 8096 करोड़ 2017 में रिटर्न ऑफ किया गया 57 हजार 585 करोड़ रिकवरी की गई 2017 में रिटर्न ऑफ किया गया रिकवरी हुई 8680 करोड़ में रिटर्न ऑफ किया गया 84272 करोड़ रिकवरी हुई मात्र ₹100 यानी पहले 4 बरस में बैंकों में कर्ज लेकर लूट गए ₹270500 नजर ना आए इसकी व्यवस्था की गई जबकि बैंकों की सक्रियता इन 4 बरस में रिकवरी कर पाई सिर्फ 29 लाख 343 करोड रुपए तो फिर बैंकों में कैसे सुधार मोदी सत्ता के दौर में आ गया। क्योंकि अनूठा सच तो यह भी है करीब 90 पीस द रिटर्न ऑफ कर दिया गया और अगर बैंकों के जरिए हालात को समझा तो 2014 से 2018 के बीच यूको बैंक ने कोई रिकवरी ही नहीं की जबकि कर्ज दे दिया 6087 करोड़ जिसे मोदी सरकार ने रिटन ऑफ कर दिया देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इन 4 बरस में कर्ज़ की रिकवरी की सिर्फ 103 96 करोड़ और जो रिकवरी नहीं हो पाई वह रकम है 102 587 करोड़ रुपए और इन रकम को बैंक ओके फाइलों से रिटन ऑफ कर दिया गया और यह बकायदा रिजर्व बैंक के जरिए जारी की गई 21 बैंकों की सूची है जो साफ-साफ बताती है कि आखिर जो एनपीए 2014 में सवा दो लाख करोड़ का था वह 2019 में बढ़ते बढ़ते 12 लाख करोड़ भी पार कर चुका है और एनपीए का बढ़ना महज इंटरेस्ट रेट नहीं होता है बल्कि इस दौर में कर्ज देकर लूट को बढ़ाने की सिलसिला भी कैसे सिस्टम का हिस्सा का हिस्सा हो गया हो और लूट को रोकने का जो दावा प्रधानमंत्री चैनल के उद्घाटन भाषण में कर गए उस पर हमें लगता है चैनल को अलग से रिपोर्ट तैयार कर बताना चाहिए कि कैसे बीते 5 बरस के दौर में बैंक फ्रॉड के मामले हवाई गति से बढ़े हैं। तो इंतजार कीजिए 23 मई का
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Milan Tomic

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