सत्ता ही कॉरपोरेट है सत्ता ही सब कुछ है सत्ता ही बिजनेस के तौर पर खड़ी हो जाएगी तो आप क्या कीजिएगा और फिर कि आप उस लोकतंत्र को तलाश करना चाहते हैं तो हमें लगता है। एक चीज नहीं परिस्थिति में जागी है। ₹72000 जो न्यूनतम आय का मसला है। इनको जरा समझिए 72000 सालाना का मतलब यह है इस देश के भीतर में पहली बार निचला तब का है जो गरीबी रेखा का सबसे निचला तब का है जिसमें 20% लोग को चुना गया है। उसको लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए सालाना दिए जाएंगे। उसकी आय 6000 से कम होगी। जिसको दिए जा रहे हैं और उसको ₹6000 दिए जाएंगे जो क्या होगा। हमारे पास इस देश में कोई डाटा तो है नहीं डांटा तो तब होता है जब कहीं नौकरी कर रहा होता है ।गरीबी की रेखा के नीचे। लेकिन मान लीजिए कोई किसी के घर में काम कर रहा है कोई कंस्ट्रक्शन मैं काम कर रहा है कोई दुकान पर काम कर रहा है उसका तो कोई डाटा हमारे पास होगा नहीं। एनएसएसओ के पास भी नहीं है ।डाटा अब क्या होगा इस देश के भीतर में उसकी आय में वृद्धि होगी उसकी आय में वृद्धि का मतलब यह है वह कमा रहा है उसको पास 6000 रुपया आएगा बीपीएल परिवारों को जो महीना का खाना पीना मिलता है। सस्ता अनाज मिलता है। उसको जोड़ दीजिएगा तो 600 से ₹800 के भीतर उनके परिवार का खर्चा निकल जाता है खाने पीने का 1 महीने का जब उसके पास 6000 आ रहे हैं तो जाहिर है ₹5000 एक्स्ट्रा है। यह मजदूर के पास कितने रुपए और निचले स्तर पर जब पैसे आने लगेंगे इसका असर क्या होगा। इसका असर यह होगा कि आने वाले वक्त में लेबर जो है महंगा हो जाएगा। इसका असर सबसे ज्यादा middle-class पड़ेगा एक तो महंगाई बढ़ेगी। निचले कि आय जब बढ गई तो महंगाई बढ़ेगी और महंगाई बढ़ने के साथ उसकी जो अपनी आए हैं। वह जब लेकर जब कोस्टली होगा तो उसका असर कॉरपोरेट पर भी पड़ेगा।
कॉरपोरेट जितना एक्सपोर्ट करता है जितना प्रोडक्शन दे रहा है। आने वाले वक्त में कॉरपोरेट पर सीधा हमला होने वाला है मिडिल क्लास के सामने मुश्किल आने वाली है। लेकिन हमारा यह नहीं कहना है 1991 के बाद से इकोनामिक रिफॉर्म की पूरी सोच थी वह सोच किस तरीके से अब 2019 में आकर उल्टी हो रही है।देखिए मोदी यह नहीं कर सकते हैं कि आपने 72000 कर दिए तो हम आपको ₹1 लाख देंगे। क्योंकि वह कारपोरेट की पीठ पर सवार है। कांग्रेस कॉर्पोरेट की पीठ पर सवार नहीं है। कांग्रेस को सत्ता चाहिए और हर हाल में चाहिए।
और वह समझ रही है इस देश की इकोनॉमिक अगर ग्रामीण भारत दिशा से खड़ी होगी वहां पर इंप्लीमेंट हो रहा है या रूरल इंडिया का मजदूर वह अगर इस इन पावर हो रहा है। उनको जब ताकत मिल रही है तो वह चाहेगा कि कांग्रेस सत्ता में आ जाए। कांग्रेस चीजों को इंप्लीमेंट कर रही है हिंदुस्तान का इकोनॉमिक्स मॉडल लग रहा है। कांग्रेस ने कॉरपोरेट से मोह भंग होकर वह सारी चीजें छोड़ दी है। क्योंकि कॉरपोरेट ने जिन तरीके सत्ता का उपयोग किया और सत्ता ने कॉरपोरेट का। इससे आगे चीजें नहीं जा सकती है। यह नजर आता है कि मोदी है इन्होंने हर चीज को अपने अनुकूल इंप्लीमेंट कर लिया है जिससे लगता है 'हम हैं' किसी संगठन में आपको नाम नजर में आता है क्या सीएजी के चेयरमैन ईमानदार हैं? आपको सीबीआई डायरेक्टर ईमानदार के तौर पर नजर आएंगे? यदि आपको इमानदारी के तौर पर नजर आएंगे क्या इलेक्शन कमिशन ईमानदार के तौर पर नजर आएंगे? क्या सुप्रीम कोर्ट के भीतर से सवाल नहीं उठे क्या I ब्यूरोक्रेसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसी भी इसी का नाम नजर में आता है आपके जेहन में मेडिकल क्षेत्र में नाम नजर आता है नहीं नजर आता है।
एक ही नाम नजर आता है। सिर्फ और सिर्फ मोदी सत्ता की मौजूदगी। क्योंकि यह समाज का बदलता चेहरा है जिससे आईने
का काम टीवी कर रहा है कोई सीधा आरोपी है तो कोई सह-आरोपी लेकिन सजा के दायरे में सभी आएंगे। क्योंकि टीवी चैनल नहीं समूचा समाज दरक रहा है।
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