जनता की गरीबी सत्ता की रईसी

जनता की गरीबी सत्ता की रईसी की बात जब सामने आती है तो आपके जेहन में एक सवाल उठता होगा कि गरीबी की चर्चा शुरु इस देश के भीतर होती कहां से है। जनता की गरीबी और सत्ता की रईसी की नब्ज पहली बार राम मनोहर लोहिया ने पकड़ी थी। वह भी नेहरू काल में 1963 में चुनकर जब वह पहुंचे थे। लोक सभा के भीतर तो उस वक्त की महत्वपूर्ण एक बहस थी। 3 आना बनाम 15 आना लोहिया का कहना था कि देश के भीतर उस समय 18 करोड़ लोग चार आने पर जिंदगी बसर करते । नेहरू जी ₹25000 अपने खर्च में उड़ा देते इस बातों का जिक्र उस वक्त जब आप पढ़ना शुरू कीजिएगा तो बड़ी शानदार बहस हुई थी और प्लैनिंग कमिशन ने उस समय। पर कैपिटा इनकम जो उन्होंने निकाली थी 15 आने निकाली थी। यानी 15 आने प्रति व्यक्ति आय है। हाल में मोदी सत्ता में निकाला है जिसमें सवा लाख बता रही है की सवा लाख रुपए प्रति व्यक्ति आय हो गई है। लेकिन उस वक्त जानकारी थी लोहिया का साफ तौर पर कहना था कि यह सही नहीं है और बकायदा उन्होंने चैलेंज किया पार्लियामेंट के भीतर चैलेंज किया या दो बातों से किया इस बात को लेकर किया की प्लानिंग कमीशन के आंकड़े जो हैं। वह सही आंकड़े नहीं हैं और उन आंकड़ों को लेकर जब वह शुरू हुई। एक पूरी रिसर्च टीम उनके लिए काम कर रही थी। बीएचयू यूनिवर्सिटी के छात्र तथ्यों को फैक्ट के साथ रखने में उनकी मदद कर रहे थे। पीएचडी कर रहे थे वह तमाम लोग जुटे हुए थे। अरगुमेंट और तथ्य के साथ फैक्ट रखते थे और लोहिया उन पर बहस करते थे। प्लैनिंग कमिशन को मानना पड़ा कि लोगों की पर कैपिटा इनकम 9 आना से 11 आना के बीच है। उस समय लोहिया बोला करते थे प्रधानमंत्री नेहरू ₹25000 प्रतिदिन जो खर्च करते हैं वह गरीबों के बारे में क्या सोचेगा।

सवाल यह नहीं है कि राहुल गांधी ने न्यूनतम आय का जिक्र कर दिया इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दे दिया। सवाल यह भी नहीं है कि मोदी सत्ता अतीत की बात कहकर मौजूदा वक्त में मजा लूट रही है। सवाल यह है कि मौजूदा वक्त में मोदी सत्ता का सच क्या है। हमें लगता है उसी परिपेक्ष में जरा समझना चाहिए क्योंकि नेहरू पर आरोप लगे 25000 का रोज वह जीवन जीते हैं और इस देश के भीतर चार आने में 18 करोड़ लोग जीवन जीते हैं। लेकिन मौजूदा सच क्या है मौजूदा सरकार के ही आंकड़े देखें तो 28 से ₹35 के बीच में इस देश में 33 करोड़ लोग जीवन जी रहे हैं जो गरीबी रेखा से नीचे हैं। लेकिन दूसरी तरफ इस देश की प्रधानमंत्री की रहीसी क्या है। हमें लगता है यह आप को समझना चाहिए।
पहली बार आ चुकी चुनाव धीरे धीरे नजदीक आ रहा है और यह बहस चल पड़ी है कि इस चुनाव में पता नहीं कितना खर्च होगा। तो हम आपको सिलसिलेवार से बताना चाहते हैं कि मौजूदा सत्ता का सच पिछले 5 बरस का रहा क्या कितना खर्च किया कितना प्रचार प्रसार में कितना उड़ा दिया गया सबसे पहले तो जरा समझने की कोशिश कीजिए 2013 - 14 में नरेंद्र मोदी जब चुनाव प्रचार कर रहे थे। वह क्या कहते थे 60 बरस उनको दिए 60 महीने हमको दे दीजिए। 60 महीने दे दिए गए। इस 60 महीने के दौर में जो सरकार के ही आंकड़े बतलाते हैं जो आप गिनना चाहेंगे तो आप गिन भी सकते हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि लगभग 565 दिन प्रधानमंत्री मोदी विदेश यात्रा पर रहे। इन 565 दिन का मतलब है 18 महीने 25 दिन, 60 महीने में से 18 महीने 25 दिन नरेंद्र मोदी यात्रा पर रहे। देश के भीतर जो चुनावी रैली करना और इधर उधर जाना जो गैरसरकारी यात्राएं हैं यानी पॉलीटिकल यात्राएं उस में तकरीबन 101 दिन और कब गया यानी 3 महीने 11 दिन और कब गए इन दोनों को मिला दीजिएगा तो 22 महीने 6 दिन प्रधानमंत्री मोदी देश के भीतर या विदेश की यात्रा पर रहे। 15 जून 2014 से 3 दिसंबर 2018 तक 92 में देश की विदेश यात्रा प्रधानमंत्री मोदी करते हैं। आपके जहन में यह सवाल आना चाहिए कि खर्च कितना हुआ होगा। हर यात्रा पर और ओस्तन जो है 22 करोड़ रुपया खर्च आता है और सब को जोड़ दीजिएगा 5 बरस के दौर में जितनी विदेश यात्रा पर खर्च हुई है वह बैठता है तकरीबन 20 अरब 12 करोड़। जी इतना खर्च होता है। विदेश यात्रा प्रधानमंत्री मोदी पर और देश के भीतर यात्रा किस रूप में किया जाता है वह जरा समझने की कोशिश कीजिए। जब प्रधानमंत्री मोदी को देश के भीतर यात्रा करते हैं तो वायुसेना का जहाज लेते हैं यूपी इलेक्शन हो रहा था तो प्रधानमंत्री मोदी गोरखपुर जाते हैं या गोरखपुर में चुनाव उप चुनाव होता है तो रैली करने जाते हैं गोरखपुर यात्रा के लिए व कमर्शियल रेट पर उनको वायु सेना को पैसा देना पड़ता है। कमर्शियल रेट जो हमारे यहां प्रधानमंत्री देते हैं। वह 1999 का है। गोरखपुर से आना और गोरखपुर जाना सरकार वायु सेना को देती है ₹31000 आपके जेहन में आता होगा कि ₹31000 में आना जाना संभव है क्या। यह इंपॉसिबल चीज है इस पैसा को जो हम आपको बतला रहे हैं यह किसका पैसा है क्या प्रधानमंत्री को इस रुप में खर्च करने की इजाजत दी जानी चाहिए।
एक आरटीआई की रिपोर्ट निकल कर सामने आई कि प्रधानमंत्री मोदी का प्रचार प्रसार पर खर्च 43 अरब 43 करोड़ 26 लाख रुपए।यह खर्चा 15 मई 2018 तक का है। जब मोदी सत्ता सरकार में आई तो उन्होंने प्रिंट पर यानी अखबारों को जो विज्ञापन दिए वह विज्ञापन की कीमत है 4 अरब 85 करोड़ 24 लाख, जो न्यूज़ चैनलों को दिया गया विज्ञापन के तौर पर वह है 4 अरब 48 करोड़ 97 लाख रुपया, इस से हटकर जो आउटडोर प्रचार-प्रसार किया जाता है जो आप देखते होंगे रैली में हार्डिंग लगी होती है उस पर खर्च हुए 7 9 करोड़ रुपए 72 लाख खर्च हुए थे सिर्फ 2014 15 का आंकड़ा है। अगर आप 15 -16 का जानना चाहते हैं तो अखबारों का विज्ञापन में 5 अरब 10 करोड़ 69 लाख रुपए, न्यूज़ चैनलों को दिया गया 5 अरब 41 करोड़ 99 लाख रुपए, और आउटडोर के लिए तकरीबन 1 अरब 18 करोड़ 43 लाख, यह सिर्फ 15 -16 का है ।अब 2016 -17 का भी जानिए प्रिंट का थोड़ा सा कम कर दिया जाता है ।इसमें 5 अरब से घटाकर 4 अरब 6 3 करोड़ 38 लाख दिए जाते हैं। लेकिन न्यूज़ चैनलों का खर्च बढ़ जाता है या बढ़कर हो जाता है 6 अरब 13 करोड़ 78 लाख रुपए ,और आउटडोर में जो प्रचार प्रसार होता है उसमें एक अरब 85 करोड़ 99 लाख रुपए, यह हर बरस दर बरस है अब इनको जब जोड़ते चले जाइएगा तो 43 अरब 43 करोड़ 2600000 रुपए प्रचार-प्रसार में प्रधानमंत्री मोदी पानी की तरह बहा देते हैं। और तो और दूरदर्शन ऑल इंडिया रेडियो का बजट जो रखा गया वह है 28 अरब 20 करोड़ छप्पन लाख रुपए।
नेहरू का 25000 तो बहुत पीछे छूट गया तो क्या मान लिया जाए वाकई में सत्ता रईस हो चुकी है और रईसी के बल पर चुनाव जीतना चाहती है तो 2019 का चुनाव वाकई मायने रखता है?
SHARE

Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a Comment

देश के 47 वें चीफ जस्टिस होंगे शरद अरविंद बोबड़े

नगपुर में जन्में जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े देश के 47 वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर 18 नवम्बर को शपथ लेगेें । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जस्ट...