जब इस बात का जिक्र होता है कि आप अगर प्रधानमंत्री पर हमला करते हैं तो फिर आप इस देश पर हमला करते हैं आप अगर हमसे सबूत मांगते हैं आप सेना के ऊपर हमला कर रहे हैं अजीबोगरीब स्थितियों हैं इस देश के भीतर में सत्ता घुमा फिरा कर खुद को केंद्र को बीच में ले आती है हम सत्ता पर चलिए सीधे आरोप लगाते हैं आपने इस देश के संविधान को लागू किया है क्या देश को संविधान के हिसाब से चल रहा है उसी संविधान में आपकी चुनाव का जिक्र भी है तभी आप चुनाव भी लड़ पा रहे हैं नहीं तो 1947 की स्थिति में चले जाइए जब एक नेशनल गवर्नमेंट थी हर विचारधारा हर सोच के साथ हर व्यक्ति जुड़े हुए थे उसमें हर तरह के लोग थे उसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी मौजूद थे उसमें अंबेडकर भी मौजूद थे उसमें नेहरू जी भी मौजूद थे एक पूरी प्रक्रिया है नेशनल जब गवर्नमेंट बनती है तो हर समूह रहता है तो क्या इस देश को उसकी जरूरत पड़ गई है कि हम 1950 के संविधान से दोबारा पीछे लौट चलें हम इस बात का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकि फासीए नहीं इस चीजों में कितने मारे किसने मारे किस रूप में किए गए यह फसाया जाता है यानी पूरे देश के भीतर एक ऐसी मानसिकता विकसित कर दी जाती है आपको भी मन नहीं लगेगा टेलीविजन पर युद्ध की बात ना हो रही हो आप की भी इच्छा जागृत नहीं होगी अरे कितने मरे थे सारे 300 मरे थे कि ढाई सौ मरे थे आपको भी लगेगा यह क्या मसला है प्रधानमंत्री मोदी और दूसरी तरफ राहुल गांधी कोई भी पार्टी एक दूसरे पर आरोप नहीं लगा रहा सब तो इस देश के बारे में बात करने लगे मजा नहीं आ रहा है यह देश इस स्थिति में आ गया है आपके पास दो ही उपाय है या तो टेलीविजन बंद कर दीजिए फेक डालिए दूसरी एक स्थिति है अगर टेलीविजन देख रहे हैं तो सिर्फ उसी टेलीविज़न न्यूज़ चैनल उन्हीं खबरों को देखिए जो आप से जुड़ी हुई हो और इस देश से जुड़ी हुई हो इस देश से खबरें नहीं जुड़ी हो सकती है कि आपने बालाकोट पर जब अटैक कर दिया और कल जब सेना अध्यक्ष सामने आए वायु सेनाध्यक्ष वह जब सामने आए उन्होंने कहा अभी चीजें खत्म नहीं हुई है अरे जनाब खत्म नहीं हुई है तो चालू रखिए चीजों को इस बहस में क्यों पड़ना चाहते हैं चुनाव की दिशा में देश जा रहा है और उस दिशा के लिए मुद्दे उठा रहे कहीं साड़ियों पर सर्जिकल स्ट्राइक की तस्वीर बन रही है कहीं कोई नेता और सांसद जो है जैकेट पहन कर घूम रहा है कहीं भी जाइए यही बात का जिक्र से जानबूझकर किया जाता है क्योंकि अगर यह जिक्र नहीं करेंगे तो आपके भीतर का वह जो नहीं जागेगा आपके भीतर का जोश नहीं जाएगा तो आप सुनने क्यों आएंगे आप सुनने नहीं आएंगे तो उसकी जरूरत क्यों होगी उसकी जरूरत नहीं होगी तो फिर आप कहेंगे अरे देश तो ऐसे भी चल सकता है जब आपको लगेगा देश ऐसे भी चल सकता है तो फिर आप कहेंगे इस चुनाव की क्या जरूरत है हमारा तो कहना है इस देश के भीतर चुनाव को ही पूरी तरह रोक डालिए लेकिन इसका यह मतलब नहीं है जो मौजूदा सत्ता है उसको बने रहने दीजिए या तो नेशनल गवर्नमेंट की पर्सपेक्टिव में चले जाइए इस देश को 25 साल के लिए एक मान लीजिए लेना चाहिए एक एजेंडा लेना चाहिए हर पॉलिटिकल पार्टी का जिक्र रहेगा हम इस बात का जिक्र बार-बार इसलिए कर रहे हैं इस देश में संविधान लागू नहीं किया गया संविधान की शपथ ली गई संविधान की शपथ लेकर हर नेता ने अपनी अपनी सत्ता को साधा है I
संविधान बहुत साफ तौर पर क्या कहता है कोई निरंकुश ना हो कोई अराजक ना हो और संविधान व्याख्या जो सुप्रीम कोर्ट को थमाई गई जो दस्तावेज दिए गए उसमें वह हक किसान के लिए भी है मजदूर के लिए भी है वह महिलाओं के लिए भी है वह युवाओं के लिए भी है वह गरीबों की हक की बात करता है वह आदिवासियों की बात भी करता है वह पर्यावरण का सवाल भी उसमें दर्ज है उसमें शिक्षा का जिक्र भी है उसमें हेल्थ सर्विस का भी जिक्र है और यह सारे सवाल घुमा फिरा कर 5 साल तक चलते हैं 5 साल ना कहिए 4 साल तक चलते हैं पांचवें साल में युद्ध सामने आकर खड़ा हो जाता राम मंदिर सामने आकर खड़ा हो जाता है आपकी आस्था और आपकी भावनाओं से खिलवाड़ का खेल शुरू हो जाता है और कुछ नहीं होता तो आप के खातों में पैसा पहुंचाने या फिर एक ऐसी परिस्थिति लाई जाती है जिसके जरिए यह बात कहा जाता है अरे आपके पास इलेक्शन के समय में इतना कुछ दिया जाएगा सिलसिलेवार से जरा समझने की कोशिश कीजिए संविधान कहते क्या है इस देश में कृषि मंत्री ने संविधान की शपथ ली कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह सुप्रीम कोर्ट कहता है कि आपने जो समर्थन मूल्य तय किया आपने जिस तरीके से समर्थन मूल्य और न्यूनतम मजदूरी जो ताकि वह भी अगर इस देश में लागू नहीं है तो संविधान कहता है वह तो कम से कम लागू तो होनी चाहिए आपने क्यों नहीं लागू किया कोई रुचि नहीं है संविधान की शपथ ली गई संविधान कहता है वह लागू होनी चाहिए आप कहते हैं हमारी कोई रुचि नहीं है और इस पूरी प्रक्रिया जब हम देखते हैं चीजें आती चली जाती है तो आज की तारीख में किसानों को लेकर जिक्र जो होता है उसमें सारी चीजें कॉरपोरेट्स के पास है जिस कॉरपोरेट की रुचि उस खेती के ऊपर सबसे कम है बीज कॉरपोरेट के पास से आता है खाद कॉरपोरेट के पास से आता है पूरी सिंचाई की टेक्नोलॉजी कॉरपोरेट के पास से निकल कर आती है यानी जिंदगी जीने के तरीके कॉरपोरेट के तले सिमट गई है तो क्या यह मान लिया जाए वाकई लोकतंत्र खतरे में है l
संविधान बहुत साफ तौर पर क्या कहता है कोई निरंकुश ना हो कोई अराजक ना हो और संविधान व्याख्या जो सुप्रीम कोर्ट को थमाई गई जो दस्तावेज दिए गए उसमें वह हक किसान के लिए भी है मजदूर के लिए भी है वह महिलाओं के लिए भी है वह युवाओं के लिए भी है वह गरीबों की हक की बात करता है वह आदिवासियों की बात भी करता है वह पर्यावरण का सवाल भी उसमें दर्ज है उसमें शिक्षा का जिक्र भी है उसमें हेल्थ सर्विस का भी जिक्र है और यह सारे सवाल घुमा फिरा कर 5 साल तक चलते हैं 5 साल ना कहिए 4 साल तक चलते हैं पांचवें साल में युद्ध सामने आकर खड़ा हो जाता राम मंदिर सामने आकर खड़ा हो जाता है आपकी आस्था और आपकी भावनाओं से खिलवाड़ का खेल शुरू हो जाता है और कुछ नहीं होता तो आप के खातों में पैसा पहुंचाने या फिर एक ऐसी परिस्थिति लाई जाती है जिसके जरिए यह बात कहा जाता है अरे आपके पास इलेक्शन के समय में इतना कुछ दिया जाएगा सिलसिलेवार से जरा समझने की कोशिश कीजिए संविधान कहते क्या है इस देश में कृषि मंत्री ने संविधान की शपथ ली कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह सुप्रीम कोर्ट कहता है कि आपने जो समर्थन मूल्य तय किया आपने जिस तरीके से समर्थन मूल्य और न्यूनतम मजदूरी जो ताकि वह भी अगर इस देश में लागू नहीं है तो संविधान कहता है वह तो कम से कम लागू तो होनी चाहिए आपने क्यों नहीं लागू किया कोई रुचि नहीं है संविधान की शपथ ली गई संविधान कहता है वह लागू होनी चाहिए आप कहते हैं हमारी कोई रुचि नहीं है और इस पूरी प्रक्रिया जब हम देखते हैं चीजें आती चली जाती है तो आज की तारीख में किसानों को लेकर जिक्र जो होता है उसमें सारी चीजें कॉरपोरेट्स के पास है जिस कॉरपोरेट की रुचि उस खेती के ऊपर सबसे कम है बीज कॉरपोरेट के पास से आता है खाद कॉरपोरेट के पास से आता है पूरी सिंचाई की टेक्नोलॉजी कॉरपोरेट के पास से निकल कर आती है यानी जिंदगी जीने के तरीके कॉरपोरेट के तले सिमट गई है तो क्या यह मान लिया जाए वाकई लोकतंत्र खतरे में है l

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