देश में 40 करोड़ युवा बेरोजगार है। जमीन को लेकर किसान परेशान हैं। आत्महत्या करने से नहीं कतराते वही जमीन सरकार उद्योगपतियों के लिए निकलना चाहती है। बीते 20 बरस में हजार से ज्यादा किसान ने आत्महत्या की है और जब किसानों की बात सामने आती है तो मौजूदा सत्ता अंतरिम बजट में किसानों के लिए ₹6000 सालाना देने की पेशकश कर देते हैं हमें लगता है बात ₹6000 की नहीं है जिससे किसानों की हालत सुधर जाएगी ऐसे हजारों किसान हैं जिन्हें 2 जून की रोटी तक नसीब नहीं होती। मौजूदा हालात बतलाते हैं कि युवा की तादाद जिस तरह बढ़ रही है और नेताओं भीतर जो चिंताएं जाग रही है ।वह वाकई सोचने लायक है ।हमें लगता है कि कमोबेश हर 10 साल में किसी ना किसी मुद्दे को लेकर देश में आंदोलन दिखाई देता था और आंदोलन के जरिए संसदीय राजनीति की हकीकत और अफ़साने का आकलन किया जाता था ।खासकर छात्रों का आंदोलन अक्सर देश की राजनीति को हटाकर अपनी मौजूदगी का एहसास कराता था ।आजादी के बाद छात्रों की पहल 1955 में नजर आ गई
1955 में बिहार रोड ट्रांसपोर्ट और पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज के छात्रों के बीच किसी बात को लेकर मामूली झगड़ा हुआ लेकिन राज्य सरकार के रवैए ने कॉलेज छात्रों को भड़का दिया। छात्र एकजुट हुए पटना ही नहीं समूचे बिहार के छात्र परिवहन विभाग के खिलाफ खड़े होते गए छात्रों ने सरकार के रवैया के खिलाफ 11 सदस्य छात्र एक्शन कमेटी बना ली। कमेटी में हर विभाग का टॉपर शामिल था। नेतृत्व कर रहे थे वह भी खुद टॉपर थे। आंदोलन इतना जबरदस्त था कि जुलाई में शुरू हुए आंदोलन के बीच में 15 अगस्त आया तो छात्रों ने जगह-जगह तिरंगा फहराने नहीं दिया। उसी दौर में नेहरू भी पटना के गांधी मैदान में भाषण देने पहुंचे तो उन्होंने छात्रों को भाषण में चेताया की एक्शन कमेटी बनाकर सरकार को धमकी ना दे एक्शन कमेटी बनानी है तो जर्मनी चले जाएं। भारत में यह नहीं चलेगा लेकिन छात्र आंदोलन टस से मस नहीं हुआ। आखिरकार सरकार जो कि चुनाव हुए तो परिवहन मंत्री महेश प्रसाद समेत तीन मंत्री चुनाव हार गए
1955 में बिहार रोड ट्रांसपोर्ट और पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज के छात्रों के बीच किसी बात को लेकर मामूली झगड़ा हुआ लेकिन राज्य सरकार के रवैए ने कॉलेज छात्रों को भड़का दिया। छात्र एकजुट हुए पटना ही नहीं समूचे बिहार के छात्र परिवहन विभाग के खिलाफ खड़े होते गए छात्रों ने सरकार के रवैया के खिलाफ 11 सदस्य छात्र एक्शन कमेटी बना ली। कमेटी में हर विभाग का टॉपर शामिल था। नेतृत्व कर रहे थे वह भी खुद टॉपर थे। आंदोलन इतना जबरदस्त था कि जुलाई में शुरू हुए आंदोलन के बीच में 15 अगस्त आया तो छात्रों ने जगह-जगह तिरंगा फहराने नहीं दिया। उसी दौर में नेहरू भी पटना के गांधी मैदान में भाषण देने पहुंचे तो उन्होंने छात्रों को भाषण में चेताया की एक्शन कमेटी बनाकर सरकार को धमकी ना दे एक्शन कमेटी बनानी है तो जर्मनी चले जाएं। भारत में यह नहीं चलेगा लेकिन छात्र आंदोलन टस से मस नहीं हुआ। आखिरकार सरकार जो कि चुनाव हुए तो परिवहन मंत्री महेश प्रसाद समेत तीन मंत्री चुनाव हार गए
छात्र यह बखूबी समझते हैं कि हमारा लोकतंत्र किस दिशा में जा रहा है तो छात्रों को यह तय करना होगा कि हमें किस दिशा की ओर जाना है और 2019 का चुनाव युवा संघ के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है हम श्रेष्ठ होकर भी भागीदारी सुन्य की स्थिति में आ जाएंगे।
हम आसमान की ओर देखते हुए चौक, चौराहे, गली और रात के अंधेरे तले तारे गिनने के अलावा और कुछ नहीं बचेगा।
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